Jyotish Zone

बुध ग्रह

खगोल परिचय

बुध का व्यास 4900 किलोमीटर है। यह सूर्य से 6 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर है। अपनी तेज़ी के लिए प्रसिद्ध यह 48 किलोमीटर प्रति सैकिण्ड की औसत गति से सूर्य के गिर्द केवल 90 दिनों में घूम जाता है परन्तु अपनी धुरी पर इसे घूमने में 60 दिन लगते हैं।

पौराणिक वर्णन

बुध के जन्म की कथा अति विचित्र है। चन्द्र, देव गुरु (बृहस्पति) की पत्नी तारा को भगा ले गये थे। देवताओं द्वारा प्रार्थना करने पर तारा जब बृहस्पति को लोटा दी गई तो उस समय तारा गर्भवती थी, माना गया है कि उसने चन्द्र के पुत्र बुध को जन्म दिया। इस पौराणिक कथा का आधार ॠग्वेद में (10/109) तथा अर्थवेद के 13वें मण्डल में मिलता है, जहाँ पर बृहस्पति की पत्नी तारा का एक क्षत्रिय जाति के पुरुष द्वारा हरण का उल्लेख दिया गया है। वायु पुराण (27/56, 66/22) के अनुसार बुध, चन्द्र और रोहिणी के पुत्र बताये गये हैं। वैदिक संहिता में बुध का जन्म चन्द्र नक्षत्र श्रविष्ठा से भी होना माना गया है। इन्हें राज पुत्र कहा गया है।

मत्स्य, वायु एवं विष्णु पुराणों के मत से इनका रथ चमकदार श्वेत रंग का है, जिसे भिन्न रंगों के 10 घोड़े खींचते हैं। यह नपुंसक लिंग, शूद्र हैं, तथा अथर्ववेद के ज्ञाता हैं, अर्थशास्त्र के विद्वान एवं हस्तिशास्त्र के प्रवर्त्तक हैं। इनका वर्ण दूब घास जैसा कुछ श्याम है, इनकी 18 किरणें हैं तथा यह ग्रहों में सबसे नीचे हैं (वायु पुराण 101/132) अर्थात् सूर्य के निकटतम हैं। बुध का विवाह वैवस्वत मनु की पुत्री इला से हुआ जिससे चन्द्र वंश का आरम्भ हुआ था।

उपाय: भविष्योत्तर पुराण एवं निर्णय-अमृत के मत से जब शुक्ल पक्ष की अष्टमी बुधवार को पड़े तो बुध की पूजा करने से उत्तम बुद्धि का विकास होता है। यदि उस दिन विशाखा नक्षत्र भी हो तो यह पूजा आरम्भ करने का सर्वश्रेष्ठ समय होता है।

देव सभा में बुध ने राजकुमार होने का स्थान प्राप्त किया है। मानव के जीवन में विद्याभ्यास का मुख्य समय कुमार अवस्था होती है और यही उसके भविष्य की नींव तैयार करती है। यही समय बुध के प्रभाव में होता है, जिसके फलस्वरूप हम अपनी बुद्धि को सुमार्ग पर या कुमार्ग पर लगा सकते हैं।

बुध से प्रभावित व्यक्ति

बुध का रंग दूब के समान सांवला, त्वचा सुदृढ़, मोटे केश, मोटे नाखून तथा बड़े दाँत वाला होता है। कमर मोटी, तोंद वाला शरीर भी होता है। हाथ मोटे होते हैं। आँखें कबूतर जैसी, कभी-कभी लम्बी और बड़ी भी होती हैं। इसकी प्रकृति मिश्रित (वात, पित्त, कफ वाली) होती है। चाल बिल्ली की तरह, प्रायः होंठों पर जीभ फेरता रहता है।

रजोगुणी, हंसमुख, मजाक पसंद परन्तु मासूम और डरपोक स्वभाव का होता है। नकल उतारने आदि में कुशल, कार्य चतुर होता है। मधुर वाणी वाला, किसी को भी बातों में अपना साथी बना लेता है। खाने-पीने का शौकीन होता है। अशुभ रूप में यह दूसरों को हानि पहुँचा कर प्रसन्न होता है।

शरीर पर प्रभाव

शरीर की त्वचा, जीभ, खोपड़ी, दाँत, आँत, नाक का सिरा, नाड़ियों पर इसका अधिकार है। मित्रता, नकल करना, लेखन शक्ति, खुशामद, जी हजूरी, बोलना आदि क्रियाओं को यह संचालित करता है।

खगोलीय विवरण

गुणमान
स्वराशिमिथुन, कन्या
उच्च राशिकन्या
नीच राशिमीन
मित्र ग्रहसूर्य, शुक्र, राहु
शत्रु ग्रहमंगल, गुरु, शनि, केतु
समचन्द्र

उपाय

भविष्योत्तर पुराण एवं निर्णय-अमृत के मत से जब शुक्ल पक्ष की अष्टमी बुधवार को पड़े तो बुध की पूजा करने से उत्तम बुद्धि का विकास होता है। यदि उस दिन विशाखा नक्षत्र भी हो तो यह पूजा आरम्भ करने का सर्वश्रेष्ठ समय होता है।

संबंधित

अपनी कुंडली में देखें

यह आपके लिए कहाँ स्थित है, यह जानने के लिए अपनी निःशुल्क जन्म कुंडली बनाएं।

मेरी कुंडली बनाएं