बुध बारहवां भाव में
Vyaya Bhav — व्यय, मोक्ष, विदेश
शुभ फल
जातक कार्य चतुर, नम्र, अपने वचन की पालना करने वाला, पंडित, उत्तम स्पष्टवक्ता, दीर्घायु होता है। वह उपकारी और व्यसनहीन होता है। उसे धन सम्पत्ति का लाभ होता है। उसका धन सतकर्मों में, तीर्थों में यज्ञ, पूजा आदि करने में खर्च होता है। युद्ध में शत्रु इससे कांपते हैं। वह शत्रुओं को दबाने में धन खर्च होने की चिंता नहीं करता है। असाध्य सिद्धियों तथा गूढ़ शास्त्रों पर इसका अधिकार होता है। जो विचार इसके मन में आ जाये, उसे पूरा करके ही दम लेता है।
अशुभ फल
जातक निर्दयी, बुद्धिहीन, क्रूर, निर्धन अपने परिवार में प्रकृत, धूर्त, मलिन, रोगी, पराधीन, कुसंगति में रहने वाला होता है। अपने स्वामी के लिए बात बदल लेना, झूठ या तीखा कड़वा बोलना उसका स्वभाव होता है। शराब पीने का शौंक, ढोंचा, नसों, नाक आदि की तकलीफ भोगता है। जातक अपने धर्म से भ्रष्ट हो जाता है। सभा में अपमानित होता है। राजकोप से सभा में लोक निंदा से दुःखी रहता है। चोरी, गबन, बेईमानी के कारण जेल जाना या पद अवनति आदि होती है। उसे प्रायः अधिक बोलने से हानि होती है।
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