बुध पहला भाव में
Tanu Bhav — स्वयं, शरीर, व्यक्तित्व
शुभ फल
लग्न भाव में बुध दिग्बली होता है व कुंडली के दोषों का नाश करता है इसके प्रभाव से जातक श्रेष्ठ बुद्धिवाला, शरीर तपे हुए सोने जैसा, मेधावी, तेजस्वी व दीर्घायु जीवन वाला होता है। ऐसे जातक कूटनीति निपुण होते हैं। इसलिए आसानी से किसी के वशीभूत नहीं होते। वह उदार, दयालु, कला, संगीत, गणित, ज्योतिष आदि सभी शास्त्रों का ज्ञान रखता है। अपने धर्म का तत्परता से पालन करता है। प्रकाशन, शिल्प, व्याख्यान देने व लेखन आदि से ऐसे लोग जीविका चलाते हैं। समाज में प्रतिष्ठित व राजमान्य होता है। ऐसे जातक को सरकार से धन लाभ होता है। वह भ्रमणशील होता है। हर वक्त घूमते रहने वाला होता है। कई बार प्रदेश वास, तीर्थ यात्राएं करता है। पत्नी व संतान से सुख पाता है। जीवन की मध्यावस्था अधिक सुखमय बीतती है। यदि तंत्र मंत्र में रुचि हो तो जातक भूतबाधा दूर करने में समर्थ होता है।
अशुभ फल
यदि बुध के साथ अशुभग्रह बैठे हों, तो जातक, शरारती व लालची स्वभाव का होता है। उसके शरीर में वातरोग, फोड़े, फुंसी आदि व पेट के रोग होते हैं। भूख कम लगती है। नशा, अंडा व मांस सेवन हानिकारक होता है। ऐसे जातक की बीमारी काफी असाध्य होती है। बचपन में चौथे वर्ष में कष्ट होता है। उसकी संतान गिनती में कम होती है। जीवन में एक-आध बार कोई तोहमत अवश्य लगती है। ससुराल व पुत्र से उत्तम संबंध नहीं रहते।
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