तीसरा भाव — Sahaj Bhav
भाई-बहन, साहस, संवाद
सहज भाव
तृतीय भाव को सहज अथवा भ्रातृ-स्थान भी कहते हैं। इस भाव के स्वामी तृतीयेश को सहजेश भी कहते हैं। इसी भाव से जातक के संघर्ष और परिश्रम की सीमा तथा भाई-बहनों की संख्या और उनके सहयोग का विचार किया जाता है।
इस भाव का कारक: मंगल
इस भाव का कारक मंगल है।
तृतीय भाव के मुख्य विषय
इस भाव के मुख्य विषय ये हैं:
- जातक का गला, कंधे और कान, विशेषकर दायां कान
- श्वास तथा स्नायु भाग
- सुनना
- पराक्रम
- साहस
- परिश्रम
- शक्ति
- वीरता
- धैर्य
- संघर्ष
- नेतृत्व
- सौतेली मां
- रुचियां
- योगाभ्यास
- भाई-बहन, विशेषकर छोटे
- मित्र
- सेवाकार्य
- नौकर
- सेना
- वस्त्र
- आभूषण
- औषधि
- छोटी यात्रा (समुद्र यात्रा)
- विदेश यात्रा
- शेर और जंगली जानवर
- तना
- फलदार वृक्ष
- डाक-तार विभाग
- टेलीफोन
- टाइपिंग (टंकन)
- अनुवादक
- समाचार पत्र
- वेधशाला
- मौसम विभाग
- चित्रकार
संबंधित
अपनी कुंडली में देखें
यह आपके लिए कहाँ स्थित है, यह जानने के लिए अपनी निःशुल्क जन्म कुंडली बनाएं।
मेरी कुंडली बनाएं →