दूसरा भाव — Dhan Bhav
धन, वाणी, परिवार
धन भाव
द्वितीय भाव को धन भाव कहते हैं। इस भाव के स्वामी को द्वितीयेश कहा जाता है, जिसे धनेश अर्थात् धन का स्वामी भी कहते हैं। इसी भाव से जातक की आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा का विचार किया जाता है।
इस भाव का कारक: गुरु
इस भाव का कारक गुरु (बृहस्पति) है।
मारक भाव
यह एक मारक भाव अर्थात् मृत्यु देने वाला भाव है। इसलिए जातक की मृत्यु जिस रोग या कारण से होगी, उसका विचार भी इसी भाव से किया जाता है।
द्वितीय भाव के मुख्य विषय
इस भाव के मुख्य विषय ये हैं:
- जातक का चेहरा, गला और नाक
- मस्तक पर तिलक का स्थान
- सौंदर्य
- मुख
- शरीर की सुगंध
- नेत्र, विशेषकर दाहिना नेत्र
- नाखून, जीभ, स्वर और वाणी
- संचय, धन और कोष
- भोजन तथा खाने-पीने की वस्तुएँ
- जातक का समस्त परिवार
- ससुराल पक्ष
- गाय, बैल और घरेलू पशु
- पशुओं को बाँधने का स्थान
- मिट्टी के बर्तन
- सोना, चाँदी और ताँबा
- अनाज
- किराये की वस्तुएँ
- क्रय-विक्रय
- व्यापार
- कलम से उगाये जाने वाले पौधे
- ज्योतिष
- टकसाल
- धाय
- होटल व्यवसाय
- रसोइये और खजांची
संबंधित
अपनी कुंडली में देखें
यह आपके लिए कहाँ स्थित है, यह जानने के लिए अपनी निःशुल्क जन्म कुंडली बनाएं।
मेरी कुंडली बनाएं →