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दूसरा भावDhan Bhav

धन, वाणी, परिवार

धन भाव

द्वितीय भाव को धन भाव कहते हैं। इस भाव के स्वामी को द्वितीयेश कहा जाता है, जिसे धनेश अर्थात् धन का स्वामी भी कहते हैं। इसी भाव से जातक की आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा का विचार किया जाता है।

इस भाव का कारक: गुरु

इस भाव का कारक गुरु (बृहस्पति) है।

मारक भाव

यह एक मारक भाव अर्थात् मृत्यु देने वाला भाव है। इसलिए जातक की मृत्यु जिस रोग या कारण से होगी, उसका विचार भी इसी भाव से किया जाता है।

द्वितीय भाव के मुख्य विषय

इस भाव के मुख्य विषय ये हैं:

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