Jyotish Zone

सूर्य दूसरा भाव में

Dhan Bhavधन, वाणी, परिवार

शुभ फल

जातक सच्चरित्र, त्यागी, दानी व धार्मिक स्वभाव का होता है। बहुमूल्य धातु, सोना-चांदी का स्वामी होता है। मधुर भाषी व तर्क प्रवीण होने से शत्रु को भी अपने अनुकूल कर लेता है। वह भाग्यशाली होता है। प्रांत या जिले के अधिकार एवं पूर्ण पद हासिल करता है। जातक स्वयं स्वार्थहीन होता है और अपने मित्रों व संबंधियों की बहुत सहायता करता है। परोपकारिता व सेवा मार्ग से उसके अपने भाग्य की वृद्धि भी होती है। चौपायों से लाभ रहता है। वाहन-सुख श्रेष्ठ रहता है। जातक के जन्म पर पिता का भाग्योदय होता है।

अशुभ फल

जातक मूर्ख, दंभी, क्रोधी, कंजूस व कुरूप होता है। अहंकारवश शुभ कार्य नहीं करता। वाणी, नेत्र, मुख, रोग, चोरी व राजदंड से पीड़ित होता है। शिक्षा में बाधा पड़ती है। स्त्रियों से उत्तम संबंध नहीं रहते। स्त्री के कारण कुटुंब में क्लेश रहता है। रतिसुख कम ही नसीब होता है। जेवर, भूमि और स्त्रियों के झगड़ों में पड़ने से जातक मान-सम्मान व अपनी नौकरी आदि में भी हानि उठाता है।

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