मंगल दूसरा भाव में
Dhan Bhav — धन, वाणी, परिवार
शुभ फल
जातक सत्यवक्ता व दुष्ट व्यक्तियों का वैरी होता है। वह प्रदेश वास कर धन लाभ प्राप्त करता है। पुत्रवान होता है। प्रायः स्वयं बड़ा भाई होता है या घर में बड़े की तरह उत्तरदायित्व संभालता है। भाइयों की मदद करने में स्वयं भी धनी बन जाता है। जातक वाद-विवाद में कुशल होता है। उससे हारा व्यक्ति दुबारा उसके सामने आने की हिम्मत नहीं करता। धातु का व्यापार, खेती-शेयर आदि से धन लाभ कमाता है। अचानक धन की प्राप्ति होती है। ससुराल से उत्तम संबंध होते हैं। स्त्रीधन से धन को बरकत व दूध-पूत का सुख बढ़ता है।
अशुभ फल
जातक निर्धन, निर्दयी, विद्याहीन, मूर्ख व क्रूर होता है। हर बात में विरोध करने की उसकी आदत होती है। उसे नेत्र या वाणी-दोष हो सकता है। जातक स्वयं अपने कमाए धन का उपयोग नहीं कर पाता। केवल संचय ही करता है। उसका धन राजदंड, चोरी या मुकद्दमेबाजी में नष्ट हो जाता है। इसलिए कर्जदार भी हो सकता है। वह नीच कुत्सित व्यक्तियों की नौकरी करता है। स्त्री, पुत्रों व संबंधियों से उत्तम संबंध नहीं रखता। उसकी मौत भी अचानक लड़ाई झगड़े में हो सकती है।
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