मंगल पहला भाव में
Tanu Bhav — स्वयं, शरीर, व्यक्तित्व
शुभ फल
जातक सिंह समान पराक्रमी, फुर्तीला, घुमक्कड़, तीक्ष्ण स्वभावी निर्भय व गर्वीला होता है। वह दृढ शरीर वाला निरोगी व दीर्घायु होता है। खेल, सेना व पुलिस आदि क्षेत्रों में सफल होता है। ऐसा जातक नेक होता है और किसी की नेकी व सच्चाई को कभी नहीं भूलता। वह यशस्वी होता है। सरकार आदि से सम्मान पाता है। जातक यदि पुरुष हो तो उसके भाई अवश्य होते हैं। अगर स्वयं बड़ा भाई हो, तो शत्रुओं को हमेशा पराजित करने वाले भाग्य का स्वामी होता है। अपनी बराबर की उम्र वाले संबंधी (खासकर चाचा, भतीजा आदि) के साथ लाभ पाता है। यदि मंगल वक्री हो तो रूपवान होता है। उच्च राशि का या शुभ मंगल धनी, विद्यावान, सर्जन, या इंजीनियर बनता है। यदि तपस्वी हो, तो उसका दिया शाप कभी बेकार नहीं जाएगा।
अशुभ फल
जातक कुरूप, रोगी, झूठा, धनहीन व परस्त्रीगामी होता है। उसका चित्त भ्रम व संताप से भरा रहता है। वह चुगलखोर, झगड़ालू होता है और मुफ्तखोरी की आदत से बरबाद हो जाता है। उसको लोहा, लाठी, गोली आदि अस्त्रों से चोट लगती है। देह में घाव होते हैं। वह सिर, नेत्र पीड़ा, उदर व दांतों के रोग, रक्तविकार व फोड़ा आदि से पीड़ित होता है। जीवन में प्रत्येक कार्य की सिद्धि में प्रायः विघ्न पड़ते हैं। स्त्री पुत्रों आदि से दूर रहना पड़ता है या पत्नी को शारीरिक कष्ट रहता है। यदि जातक दुष्ट पापी हो, तो संतान-रहित भी हो सकता है।
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