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मंगल बारहवां भाव में

Vyaya Bhav — व्यय, मोक्ष, विदेश

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मंगल बारहवां भाव में

शुभ फल

जातक हंसमुख, सुदृढ़ शरीर वाला व कार्यकुशल होता है। वह भ्रमणशील होता है, कई बार विदेश यात्राएं करता है। वह सत्यवादी, उदार, स्पष्टवक्ता, त्यागी व स्वतंत्रता प्रेमी होता है। ऐसे जातक का 26वें वर्ष में प्रसिद्धि योग बनता है। दो शत्रुओं में भी मेल-मिलाप करा देने में कुशल होता है। अपने जीवन में किसी संस्था की स्थापना करता है।

अशुभ फल

जातक दंभी, पतित, पथभ्रष्ट, विरोधी स्वभाव का, धनहीन व क्रोधी होता है। अपने कुटुंबियों के कठोर वचनों से दुखी करता रहता है। जातक के शरीर में कई बार चोटें लगती हैं। नेत्र रोगी होता है। ऐसे जातक का जीवन दुख पराधीनता से भरा होता है। उसको झूठ, चोरी आदि का कलंक लगता है कई बार अपमानित होने या जेल जाने तक की नौबत आ जाती है। वह चोरी आदि के कारण धन हानि उठाता है। यह मंगल जातक की पत्नी के लिए कष्टकारक होता है। अक्सर चाचा और फूफा के लिए भी अशुभ फल दायक होता है।

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