शुक्र दूसरा भाव में
Dhan Bhav — धन, वाणी, परिवार
शुभ फल
जातक सुन्दर आँखों वाला, धनी, विद्वान, मधुरभाषी, बन्धु मान्य, यशस्वी, राजपूजित, गुरुयुक्त होता है। धार्मिक भाव वाली बुद्धि होती है। वह तीव्र, कुशाग्र बुद्धि होता है। शास्त्रादि में व्यसन जैसी रुचि रखता है। अतः कई विद्याओं का ज्ञाता होता है। वह स्वच्छ वस्त्रों तथा उत्तम भोजन का शौकीन होता है। ऐसा जातक स्वाभिमानी होता है। दूसरों के आगे हाथ नहीं फैलाता है। ऐसा जातक सुन्दरता का पुजारी तथा चित्त स्त्रियों में डूबा रहता है। विशेषकर स्त्रियों को प्रसन्न करने वाली मोहक वाणी बोलता है। वह विद्या तथा स्त्री द्वारा धन प्राप्ति करता है। मोहक वाणी बोलता है। व्यापार से भी हमेशा लाभ रहता है। इसका खजाना भरा रहता है। अपने घर की परम्पराओं को निभाने वाला होता है। बंधु बांधवों से मान्यता तथा सुख मिलता है। विदेश में मान पाता है। विरोधी दबे रहते हैं। विवाह के बाद भाग्य उदय होता है और अपनी घर गृहस्थी भली प्रकार से चलाता है।
अशुभ फल
यदि शुक्र अशुभ हो, पाप ग्रहों से प्रभावित हो तो जातक कामुक, विलासी, शराबी होता है। उसे नेत्रों के रोग होते हैं। धन हानि होती है। पत्नी की बीमारी आदि पर धन खर्च होता है। कई बार पत्नी बच्चे पैदा नहीं कर सकती या करना नहीं चाहती। ऐसे जातक की पत्नी को उसके घर के लोग पसंद करते हैं, परन्तु वह उन्हें कम ही अच्छे लगते हैं। जातक यदि चरित्रहीन हो तो उसका भाग्य हर ओर से हार दिखाता होगा। हस्तमैथुन तथा बाजारी स्त्रियों से संबंध हर तरह की बर्बादी का बहाना होगा।
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