शुक्र पहला भाव में
Tanu Bhav — स्वयं, शरीर, व्यक्तित्व
शुभ फल
जातक निरोगी, तेजस्वी शरीर, सुन्दर आँखें, सुखी, विद्वान, दीर्घायु पर भीरु होता है। सभी कार्य करने में वह चतुर होता है। सत्पुरुष का संग करता है तथा विरोधियों का नाश करता है। वह गायन, शिल्पकला में निपुण होता है तथा स्थिर प्रकृति धर्मात्मा होता है। जातक का राजदरबार से उत्तम संबंध रहता है। उसका एक ओर वाला स्वभाव होता है, जिस पर खुश होकर सब कुछ न्यौछावर कर दे, परन्तु विरुद्ध होने पर शत्रु की मिट्टी तक उड़ा दे। वह शुभ कर्मों पर अपना धन खर्च करता है। वह वीर्यवान्, स्त्रियों का प्रशंसक, काम क्रीड़ा में निपुण होता है तथा कई सुन्दर स्त्रियों से रति क्रीड़ा करता है। भोजन में इसे खट्टी तथा नमकीन वस्तुएं पसंद आती है। इसके पुत्र भी दीर्घायु होते हैं। पति-पत्नी में अच्छा प्रेम रहता है। ऐसे व्यक्ति को कोई कार्य आरम्भ करने से पहले बड़ों से सलाह कर लेना लाभदायक होगा।
अशुभ फल
यदि शुक्र अशुभ असर का हो तो जातक व्यभिचारी होता है। जातक को वात और पित्त तथा गुप्त रोग होता है। कमर, पीठ, उदर आदि पर कोई व्रण आदि होता है। पत्नी की सेहत मंदी होती है। माता का सुख अल्प होता है। शुक्र अस्त या नीच राशि में हो तो चोरी, ठग्गी आदि से धन हानि होती है। पराई स्त्रियों से संबंध से जातक के भाग्य का और भी नाश होगा।
संबंधित
अपनी कुंडली में देखें
यह आपके लिए कहाँ स्थित है, यह जानने के लिए अपनी निःशुल्क जन्म कुंडली बनाएं।
मेरी कुंडली बनाएं →