राहु दूसरा भाव में
Dhan Bhav — धन, वाणी, परिवार
शुभ फल
जातक कीर्तिमान, निर्भय व सुखी होता है। इसकी ठोड़ी पर चिन्ह होता है। स्वदेश में काफी संघर्ष करता है, पर प्रदेश में रहकर विशेष धनी हो जाता है। वह अपने धन, द्रव्य को संभाल कर रखता है। लेकिन कुबेर के समान धनी होने पर भी धन का उपयोग नहीं कर पाता। वह मंत्री या उच्च अधिकारी बनता है। भैंस, मांस, मछली व चमड़े आदि के व्यापार से धन कमाता है। उसे गृहस्थी का सुख प्राप्त होता है। इसके शत्रुओं का स्वयं ही नाश हो जाता है। धार्मिक संस्था से यदि संबंधित हो, तो जातक मठाधीश होता है।
अशुभ फल
जातक झूठा, मुंहजोर, अविवेकी, घमंडी व कटुभाषी होता है। उसकी नाक बड़ी और दांत ऊंचे-नीचे, टेढ़े-मेढ़े होते हैं, या मुख व दांत के रोग होते हैं। वह भिखारी को भिक्षा तक देना पसंद नहीं करता, चाहे स्वयं दूसरों का माल हड़प ले। ऐसे जातक की गबन या चोरी आदि से धनहानि होती है। वह बंधु-बांधवों का विरोध करता है व दुष्ट लोगों के वश में होता है। उसे शस्त्रादि से चोट का भय रहता है या वह राजदंड भोगता है। जीवन में ऐसे जातक को बहुत विरोध सहना पड़ता है। वह अपनी बात साफ नहीं कह पाता या व्यर्थ का बकबक करने वाला होता है। यदि राहु पाप ग्रहों के साथ या दृष्टि में हो, तो एक से अधिक स्त्रियों से संबंध होते हैं और पुत्र की ओर से उसे कष्ट होता है।
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