राहु पहला भाव में
Tanu Bhav — स्वयं, शरीर, व्यक्तित्व
शुभ फल
जातक शक्तिशाली, साहसी, समर्थ, पराक्रमी व वाद-विवाद में तत्पर रहता है। विजयी भी होता है। सुंदर वेषभूषा का शौक रखता है। वह शत्रु विजेता और दूसरों के प्रभाव से स्वार्थ पूरे करवा लेता है। अपने कुल का उद्धारक होता है। ऐसे जातक को अचानक धन लाभ होता है। उसमें काम शक्ति प्रबल होती है। यदि राहु उच्च प्रभाव में हो, तो राजयोग बनाता है और राज वैभव दिलवाता है। ऐसा जातक अतिदीन घर में भी जन्म लेकर उच्च पदों पर पहुंच जाता है।
अशुभ फल
जातक कुरूप, व्यभिचारी, दुष्टबुद्धि, रोगी, आलसी, दुखी, ठग, स्वार्थी, दयाहीन व शीलहीन होता है। चेहरे पर काले दाग होते हैं। यह अनेक स्त्रियों से आसक्त रहता है। पत्नी का स्वास्थ्य अक्सर क्षीण रहता है। उसके शरीर के ऊपरी भाग में व सिर में कोई रोग होता है। वह पुत्रहीन होता है या कोई संतान मर जाती है। राज्य से द्वेष करता है, परिणामस्वरूप पद उन्नति आदि में बाधाएं पड़ती है। नास्तिक अधार्मिक हो जावे, तो और भी अशुभ फल होते हैं।
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