Jyotish Zone

राहु ग्रह

खगोल परिचय

ज्योतिष में राहु और केतु दोनों का पार्थिव अस्तित्व नहीं माना जाता है। ये दोनों छाया ग्रह हैं जो पृथ्वी और चन्द्र की कक्षाओं के परस्पर कटने से बने बिन्दु हैं। प्राय: इन ग्रहों का काम बनते कार्य में विघ्न डालना होता है।

राहु शब्द रह: धातु से निकला है जिसका अर्थ है "अकेला" या "छिपा हुआ"।

पौराणिक वर्णन

राहु दैत्यराज हिरण्यकशिपु की पुत्री सिंहिका का पुत्र है। ऋग्वेद (5/40/5) एवं अथर्ववेद (11/1/10) में स्वर्भानु नाम से राहु का उल्लेख मिलता है:

यत त्वा सूर्य स्वरभानुः तमसा अविध्यत् आसुरः अक्षेत्र वित् यथामुग्ध: भुवनानि अदीधयु:

"हे सूर्य, जब असुर वंश के स्वर्भानु ने अन्धकार से तुम्हें बेधा, तब समस्त लोक उस अज्ञानी की भांति भ्रमित होकर देखते रहे जो अपनी भूमि को नहीं पहचानता।"

अथर्ववेद में राहु की तुलना ऐसे सर्प से की गई है जो सूर्य को ग्रस लेता है। पुराणों में इसे धूमकेतु और उल्का पात का कारण बताया गया है। वराहमिहिर ने भी राहु और केतु को सर्प रूप माना है।

अमृत मंथन के समय मोहिनी रूप में भगवान विष्णु जब अमृत बांट रहे थे तो एक राक्षस द्वारा छल से अमृत पीने की शिकायत सूर्य और चन्द्र ने भगवान से की। तुरन्त उन्होंने अपने चक्र द्वारा उस राक्षस का गला काट डाला, परन्तु अमृत प्रभाव से वह जीवित रहा और अंत में अपनी तपस्या के बल पर उसने ग्रहों में स्थान प्राप्त किया। उसी राक्षस का सिर राहु और धड़ केतु कहलाता है, जो समय आने पर अपनी शिकायत का बदला सूर्य और चन्द्र को ग्रहण लगा कर लिया करता है। आज के विद्यार्थी भी जानते हैं कि ग्रहण चन्द्र और पृथ्वी की छाया के कारण लगता है। परन्तु इस कथा में वास्तव में हमें अपने पूर्वजों की कल्पना शक्ति की एक छोटी सी झलक प्राप्त होती है।

राहु से प्रभावित व्यक्ति

राहु काला, नीला या धुएं जैसे रंग वाला होता है। कुरुप, भयंकर और ऊंचा कद, हाथी जैसे शरीर वाला होता है। वृद्ध जैसा दिखता है। ठोड़ी बुलन्द होती है। काना होता है या आंखें छोटी हाथी जैसी होती हैं। वात प्रकृति का होता है।

अपने अशुभ रूप में:

अपने शुभ रूप में:

शरीर पर प्रभाव

शरीर में सिर का भाग, भुजाएं, विचार, ठोड़ी और गुदा पर इसका अधिकार है। सोच विचार, कपट, झूठ, गुटबंदी, चोर बाज़ारी, अफवाहें फैलाना, स्वप्न और पशु मैथुन आदि क्रियाओं को यह संचालित करता है।

राशि संबंध

गुणमान
स्वराशिकन्या
उच्च राशिमिथुन
नीच राशिधनु
मित्र ग्रहबुध, शुक्र, शनि, केतु
शत्रु ग्रहसूर्य, चन्द्र, मंगल
समगुरु

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