राहु नौवां भाव में
Dharma Bhav — धर्म, भाग्य, उच्च शिक्षा
शुभ फल
जातक विद्वान, सभ्य, सहृदय, कृतज्ञ, परिश्रमी, दानशील, भ्रमणशील होता है। शुरू किये हुये काम को समाप्त करके ही दम लेता है। अपने गुण चातुरी में समाज में आदर पाता है, उसकी कीर्ति निर्मल होती है। नगर प्रमुख होता है। अपने कुटुम्ब का उत्तम पालन करता है। उसके पास बहुमूल्य रत्न तथा वस्त्र होते हैं। कामकेलि में उत्साह रखता है। इसके घर में नौकर चाकर होते हैं। वह श्रेष्ठ मनोचिकित्सक बन सकता है।
अशुभ फल
जातक मंदमति, धर्मभ्रष्ट, धनहीन, दरिद्री, लोभी, आचरणहीन, धूर्त होता है। वह नीच कर्म करता है तथा गंदे वस्त्र पहनता है। इसके शरीर में अत्यंत पीड़ा रहती है। पुत्र संतान होने में बाधा आती है। उसे बंधु बांधवों से सुख नहीं मिलता, उनके मनोरंजन तथा उत्सवों में उत्साह नहीं रखता तथा वह पिता से द्वेष करता है। निम्न स्तर की स्त्रियों से संभोग करता है। शत्रुओं से भयभीत रहता है। युद्ध स्थल में जख्मी होता है।
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