नौवां भाव — Dharma Bhav
धर्म, भाग्य, उच्च शिक्षा
भाग्य भाव
नवम भाव को भाग्य भाव कहते हैं। इस भाव के स्वामी, नवमेश, को भाग्येश भी कहते हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण भाव है, क्योंकि जीवन में भाग्य, जो पिछले जन्मों के कर्म-फल को दर्शाता है, इसी भाव से जाना जाता है।
इस भाव का कारक: सूर्य और गुरु
इस भाव के कारक ग्रह सूर्य और गुरु हैं। इस भाव में गुरु या सूर्य का होना बहुत शुभ माना गया है।
नवम भाव के मुख्य विषय
इस भाव के मुख्य विषय ये हैं:
- जाघें
- भाग्य
- धर्म
- तपस्या
- गुरु-कृपा
- यज्ञ
- पूजा
- नेतृत्व
- दीक्षा
- दर्शनशास्त्र
- तीर्थ यात्रा
- उच्च विद्या
- वैभव
- प्रताप
- राज्याभिषेक
- सत्संग
- पैतृक संपत्ति
- प्रोफेसर
- धर्मचरित्र
- साला
- छोटे भाई की पत्नी
- जीजा
- दादा पोता
- पूर्वज
- धर्ममठ
- मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद, चर्च और धर्मशाला
- मेढक
- हंस
- पिछला जन्म
- धरती के अंदर रहने वाली वनस्पति
- भूतकाल
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