आठवां भाव — Randhra Bhav
आयु, रूपांतरण, गूढ़ विद्या
आयु भाव
अष्टम भाव को आयु भाव कहते हैं। इस भाव के स्वामी को अष्टमेश अथवा मृत्युयेश कहते हैं। इसी भाव से जातक की आयु, मृत्यु, मृत्युस्थान, मृत्यु का कारण और उसके बाद यश-अपयश का ज्ञान किया जाता है।
इस भाव का कारक: शनि
इस भाव का कारक शनि है।
अष्टम भाव के मुख्य विषय
इस भाव के मुख्य विषय ये हैं:
- गुदा, जननेंद्रिय और अंडकोष
- कपटी
- यौन रहस्य
- अंगहीन होना
- आपरेशन
- आयु
- जीवन मरण
- मरने का कारण और स्थान
- ऊंचे से गिरना
- चिंता
- सिर कटना
- जय पराजय
- गबन
- बदनामी
- आलस्य
- राजदंड
- जेल
- बंधन
- अपहरण
- जीव हत्या
- क्रूर कर्म
- शोध कार्य
- समाधि
- पत्नी का चेहरा तथा बालों का श्रृंगार
- वसीयत
- बीमे का धन
- अज्ञान से प्राप्त दूसरे का धन
- चोरी का माल
- विदेश यात्रा
- समुद्र यात्रा
- दुर्ग पर संकट
- सांप, बिच्छू और कुत्ते का काटना
- जहरीले बिच्छू और सर्प
- बिल
- फल-फूल वाले पौधे
- स्त्री जातक के लिए सुहाग
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