चंद्र आठवां भाव में
Randhra Bhav — आयु, रूपांतरण, गूढ़ विद्या
शुभ फल
जातक दानी, विनोदी स्वभाव, तेजस्वी, बुद्धिमान और विद्वान होता है। वह प्रदेश में भ्रमण करता है। धनवान होता है। विवाह से या वसीयत आदि से धन लाभ होता है। उसको विद्या या माता में से एक का ही सुख नसीब होगा। वह धर्म, योगाभ्यास या अध्यात्म में विशेष रुचि रखता है।
अक्सर यह माना जाता रहा है कि इस भाव में चंद्र अल्पायु योग बनाता है, पर ऐसा देखने में नहीं आता। यदि कृष्ण पक्ष में दिन का जन्म या शुक्लपक्ष में रात्रि का जन्म हो, तो चंद्रमा माता के समान अवश्य ही मनुष्य की आयु की रक्षा करता है। इसी प्रकार चंद्र यदि वृष, कर्क आदि राशि में होकर बली हो, तो दीर्घायु बनाता है। इसलिए आयु निश्चय करते समय आमतौर पर काफी सावधानी की जरूरत है।
अशुभ फल
जातक जीवन में कई तरह के रोगों जैसे: अरुचि, मंदाग्नि, प्रमेह, वातरोग व रक्त-विकार आदि से कष्ट पाता रहता है। इसलिए इसके घर में वैद्यों व डॉक्टरों का आना-जाना लगा ही रहता है। उसे जल से भय रहता है। वृद्धों के चरण छूकर आशीष लेना इन कष्टों से बचाता रहेगा।
यह अस्थिर बुद्धि वाला, दीन, चिंतित, प्रगल्भ, दुर्बल शरीर, पापी व निर्धन होता है। राज्य व चोरी से धन हानि होती है। उसके घर की गुप्त बातें नौकर-चाकर बाहर निकाल देते हैं।
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