Jyotish Zone

चंद्र ग्रह

खगोल परिचय

चन्द्र पृथ्वी का उपग्रह है। इसका व्यास 3500 किलोमीटर है। पृथ्वी से यह लगभग 4 लाख किलोमीटर की दूरी पर रहता है तथा पृथ्वी की परिक्रमा सवा सताईस दिन में पूरी करता है। इतने ही समय में यह अपनी धुरी पर भी एक चक्कर लगा लेता है। अतः पृथ्वी पर से इसका केवल आधा भाग ही दिखाई देता है। दूसरे भाग का अध्ययन पहली बार इस सदी में राकेट भेज कर ही संभव हो सका है। यह सूर्य से प्रकाश लेकर उसे बिखेरता है।

पौराणिक वर्णन

चन्द्र स्त्री स्वभाव का ग्रह है। स्त्री वंशों की जननी है। विश्व में जो कुछ भी मंगलमय तथा पवित्र और आनन्द देने वाला है, वह सब स्त्री में समाया रहता है। पूरे समाज का विकास स्त्री पर आधारित है। स्वाभाविक और लोभ रहित प्रेम माँ से ही प्राप्त होता है। ज्योतिष में चन्द्र इसी स्त्री का प्रतीक है। सूर्य राजा है तो चन्द्र रानी है। सृष्टि के सभी प्राणियों पर सूर्य के बाद चन्द्र का ही सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के तौर पर स्त्री के मासिक धर्म और चन्द्र के पृथ्वी की परिक्रमा का समय दोनों समान है। अथर्व वेद में सूर्य और चन्द्र आदित्य के दो पुत्र बताये गये हैं:

तत्रत्वा आदि रक्षताम् सूर्य्याचन्द्रमसौ उमा। (अथर्व वेद 8/2/15)

चैलिडयन लोगों को छोड़कर सभी लोग ज्योतिष में चन्द्र को स्त्री ग्रह मानते हैं। चन्द्र समुद्र मन्थन के समय निकले चौदह रत्नों में से एक हैं। इनकी गिनती देवताओं में भी होती है। इनके रथ में तीन पहियें हैं और श्वेत रंग के दस घोड़े जुते हैं। एक अन्य मत से ये अत्रि ॠषि की सन्तान हैं। ब्रह्माण्ड पुराण (4/35/51) के अनुसार ये अत्रि ॠषि के नेत्रों से उत्पन्न हुए थे। भगवान् शिव की कृपा से इन्हें चन्द्र लोक का राज्य मिला था।

भागवत पुराण (2/10/30, 5/22/8) के अनुसार चन्द्र सभी जीवधारियों का प्राण हैं। ये तीव्रगामी हैं। दो पक्षों में ही राशिपथ का पूरा चक्कर लगा लेते हैं। वायु पुराण के मत से ये वनस्पति, यज्ञ एवं व्रत के अधिपति हैं।

चन्द्र की कलाओं के विषय में पुराणों में कई रोचक कथाऐं मिलती हैं। दक्ष ने अपनी 27 पुत्रियों (नक्षत्रों) से इनका विवाह किया था। परन्तु चन्द्र उनमें से एक रोहिणी नाम वाली पत्नी से अधिक प्रेम करते थे। तैतिरीय आरण्यक (3/9) के अनुसार रोहिणी चन्द्र की प्रिय पत्नी हैं। अन्य पत्नियों द्वारा चन्द्र की शिकायत करने पर दक्ष ने इन्हें राजयक्ष्मा से ग्रसित होने का श्राप दिया। चन्द्र के बहुत विनय करने पर भगवान शिव के वरदान से दक्ष ने इन्हें 15 दिन बढ़ने तथा 15 दिन घटने का आशीर्वाद दिया।

इसी प्रकार चन्द्र के धब्बे के विषय में भी कई कथाऐं मिलती हैं। वायु पुराण (44/47) के मत में यह धब्बा शर जैसा दिखता है। एक अन्य मत से गुरु पत्नी तारा के साथ रमण करने पर शाप वश यह धब्बा लगा था। दूसरे मत से इन्द्र द्वारा अहिल्या का सतीत्व भंग करने में चन्द्र ने उसकी मदद की थी। उस समय ॠषि गौतम ने क्रोधवश अपना कमंडलु और मृगछाला चन्द्र पर फैंक मारा था जिससे ये धब्बें बने थे। एक अन्य कथा में ये धब्बा हिरण के रूप में दिखता है। दक्ष से शापित होने से चन्द्र को जब राजयक्ष्मा (टीबी) हो गई तो उसकी शान्ति के लिए ये हिरण को गोद में लिये फिरते हैं। कुछ लोग धब्बे को खरगोश का चिन्ह मानते हैं।

चन्द्र मन के प्रतीक हैं। चन्द्रमा मनसो जातः। चन्द्र तथा रोहिणी बुध के माता-पिता हैं। कहीं तारा को भी बुध की माता बताया गया है।

बुधः सोम्यः रौहिणेयः। इत्यमरः

चन्द्र से प्रभावित व्यक्ति

चन्द्र युवा और प्रौढ़, सुन्दर, गोलाकार कोमल शरीर व गोरे रंग का होता है। इसके केश काले, घुंघराले होते हैं। मध्यम से कुछ कम कद का होता है। शरीर का नाभि से नीचे का भाग भारी पर भद्दा नहीं होता। मधुर आँखें सुन्दर, घोड़े जैसी या कमल के पत्ते जैसी होती हैं, चेहरा चौड़ा होता है। प्रकृति वात-कफ प्रधान होती है।

कोमल, बुद्धिमान, चंचल और नर्म स्वभाव का होता है। कोमल वाणी वाला, दूसरे की बात में हाँ में हाँ मिलाकर उसे नर्म सा जवाब देकर अपनी ओर कर लेता है। मित्रों का प्यारा होता है। अपने से बड़ी आयु की स्त्रियों की चाहना करता है।

चन्द्र अगर दूषित हो जाए तो जातक कुछ अहंकारी और दूसरों के दुःख, दर्द के प्रति उदासीन रहने वाला हो जाता है।

शरीर पर प्रभाव

शरीर का बायाँ भाग, बायाँ नेत्र, रक्त प्रवाह, मन, दिल पर इसका अधिकार रहता है। दया, सहानुभूति, रजोदर्शन, मन की शान्ति, कामनाओं आदि को यह संचालित करता है।

खगोलीय विवरण

गुणमान
स्वराशिकर्क
उच्च राशिवृष
नीच राशिवृश्चिक
मित्र ग्रहसूर्य, बुध
शत्रु ग्रहराहु, केतु
सममंगल, गुरु, शुक्र, शनि

उपाय

स्कन्द पुराण के मत से रोहिणी-चन्द्र शयन व्रत करने से चन्द्र का शुभ फल प्राप्त होता है तथा मृत्यु के बाद चन्द्र लोक की प्राप्ति होती है।

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