चंद्र बारहवां भाव में
Vyaya Bhav — व्यय, मोक्ष, विदेश
शुभ फल
जातक शील स्वभाव का व उत्तम आचरण वाला होता है। भूख बहुत लगती है, इसलिए खाने का शौकीन होता है। वह विद्वान, दयालु, मितव्ययी और सद्व्ययी होता है। जातक का धन मंगल कार्यों में खर्च होता है। स्कूल, मंदिर व धर्मशाला आदि बनवाता है। जातक विदेश भ्रमण करता है। उसे मृत्यु के बाद स्वर्ग मिलता है।
अशुभ फल
जातक शरीर से दुर्बल व रोगी होता है। जातक क्रोधी, क्रूर स्वभाव का हिंसक, आलसी व व्याकुल होता है। नेत्र-विकार या दृष्टि कमज़ोर रहती है। उसकी मनोकामना अधूरी रह जाती है। रात को अच्छी नींद भी नसीब नहीं होती। शत्रु-भय या विरोधियों से पराजित होता है। ऐसा जातक अकारण भी दुखी रहना चाहता है। स्वयं अपने मन को जलाकर यह अपने आसपास सभी निजीजनों को भी दुखी करता रहता है। चाचा या मामा व स्त्रियों से भी जातक का प्रेम कम ही होता है। पति-पत्नी में अकारण वियोग रहता है।
संबंधित
अपनी कुंडली में देखें
यह आपके लिए कहाँ स्थित है, यह जानने के लिए अपनी निःशुल्क जन्म कुंडली बनाएं।
मेरी कुंडली बनाएं →