चंद्र सातवां भाव में
Yuvati Bhav — विवाह, साझेदारी, व्यापार
शुभ फल
जातक गंभीर पर मीठी वाणी व बुद्धि वाला होता है। वह धनी निरोग और विख्यात होता है। वह और उसकी पत्नी दोनों सुंदर होते हैं और परस्पर प्रेम करते हैं। जातक का भाग्य स्त्री से या ससुराल से बढ़ता है। उसे तीव्र कामेच्छा रहती है। काम-कला में वह बहुत कुशल होता है। काम-शास्त्र में निपुण नारियों को संतुष्ट करना ऐसे जातक के ही बस की बात है। अक्सर स्त्रियों के या अपनी पत्नी के वशीभूत रहता है। विवाह से पहले ही जातक अपनी पढ़ाई पूरी कर लेगा, वरना शादी होने पर विद्या रुक जाएगी। जातक, स्थल के व्यापार से या विदेश से धन कमाता है। माल के खरीदने-बेचने से समृद्ध बनता है या फिर कमीशन एजेंट या बीमा आदि के कार्यों से धन अर्जित कर लेगा। उसकी काव्य-शास्त्र या ज्योतिष में रुचि होती है।
अशुभ फल
जातक शरीर से कमज़ोर, लालची और ईर्ष्यालु होता है। वह घमंडी और विनयहीन होता है। यदि चंद्र क्षीण हो, तो जातक की पत्नी रोगी ही बनी रहती है और जातक परस्त्रीगामी हो जाता है। स्त्री-लंपट होने के कारण उसे ग्रंथि रोग या शस्त्र आदि से चोट लगती है। वह यदि माता से झगड़ा करे, तो उसके जीवन में दरिद्रता व सुख के पहाड़ टूट पड़ेंगे।
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