सातवां भाव — Yuvati Bhav
विवाह, साझेदारी, व्यापार
जाया भाव
सप्तम भाव को 'जाया' कहते हैं। इस भाव के स्वामी सप्तमेश को जायेश भी कहते हैं। इसी भाव से जातक के गृहस्थ जीवन का तथा पत्नी के स्वभाव, रंगरूप, चरित्र आदि का पता चलता है।
इस भाव का कारक: शुक्र
इस भाव का कारक शुक्र है। सूर्यास्त के समय सूर्य सप्तम भाव में रहते हैं।
सप्तम भाव में बली राशि
वृश्चिक राशि सप्तम भाव में बली मानी जाती है।
सप्तम भाव के मुख्य विषय
इस भाव के मुख्य विषय ये हैं:
- मूत्राशय, गुर्दे, वीर्य और गुप्तांग
- प्रणय, मैथुन क्रिया और कामवासना
- दांपत्य जीवन, विवाह, व्यभिचार, रतिकलह, मदन पीड़ा और वेश्यावृत्ति
- रास्ता भटक जाना और यात्रा का टूटना
- तलाक
- जुआ
- वाणिज्य, पद प्राप्ति और नष्ट या खोए धन का मिलना
- राजनैतिक तथा व्यापारिक प्रतियोगी
- लेन-देन
- स्त्री, पति और उनका स्वभाव
- भतीजा, भांजा और दत्तक पुत्र
- उल्टे सींग वाले पशु और अंडे देने वाले जानवर
- गूदेदार या फलदार पौधे
- दही और घी
- संगीत
- यात्रा
- पौष्टिक पदार्थ
- पान
- रंगना
- सिनेमा और फिल्म उद्योग
- परिजन
- दिया
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