छठा भाव — Ari Bhav
शत्रु, रोग, ऋण
रोग एवं शत्रु भाव
षष्ठ भाव को रोग या शत्रु भाव कहते हैं। इस भाव के स्वामी षष्टेश को रोगेश भी कहते हैं। इसी भाव से जातक के जीवन में शत्रु कैसे होंगे, वे उन पर हावी होंगे या नहीं, शरीर की बीमारी और ॠण आदि का फल लगाया जाता है।
इस भाव का कारक: शनि और मंगल
इस भाव का कारक शनि और मंगल हैं।
षष्ठ भाव के मुख्य विषय
इस भाव के मुख्य विषय ये हैं:
- नाभि, पीठ, कमर, उदर, आंतें और हाजमा
- मारण और अभिचार क्रिया
- ईर्ष्या, शंका, दुष्ट कर्म, पाप, भय, अपमान और पद अवनति
- सूजन, फुंसी-फोड़ा, रोग और चोट
- शत्रु, ॠण, विघ्न, विरोध, झगड़े, भिक्षा, विपत्ति, घड़यन्त्र और मुकद्दमेबाजी
- अग्निकांड और दुर्घटना
- मामा, मौसी और नाना का घर
- दास-दासी और अधीनस्थ कर्मचारी
- अस्त्र
- साग-सब्जी, मुरब्बे और अचार
- पक्षी और पक्षियों का व्यापार
- कुत्ता और बकरी
- धातु की खुदाई
- तंबाकू, मद्य, अफीम और व्यसन
- रसायन शास्त्र
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