मंगल छठा भाव में
Ari Bhav — शत्रु, रोग, ऋण
शुभ फल
जातक सुंदर, दीर्घ देह वाला व बली होता है। वह तीक्ष्ण विचार, बुद्धि, विद्वता का प्रशंसक, धार्मिक, सज्जन प्रेमी, पवित्र मन वाला होता है। उसकी उदराग्नि व कामाग्नि तेज होती है। वह अपने संबंधियों का व अपने ग्राम, जन समूह का श्रेष्ठ रक्षक, मुखिया होता है। उसके शत्रु बहुत शक्तिशाली होते हैं, पर वे जातक के सामने ठहर नहीं पाते। वह जीवन में कीर्ति व प्रसिद्धि पाता है, लेकिन कीर्ति के लिए उसे संघर्ष करना पड़ता है। उसका संचित धन कई बार नष्ट हो जाता है, पर दुबारा जल्दी ही धन लाभ होता है। उसकी कलम में तलवार से भी अधिक ताकत होती है। वह पुत्रवान होता है।
अशुभ फल
जातक झगड़ालू, अतिकामुक व स्त्री लोलुप होता है। कई स्त्रियों से उसके संबंध होते हैं। उसे वात व शूल रोग होते हैं। मातृ-पक्ष में यह मंगल मामा व मामी के लिए कष्टकारक होता है।
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