मंगल पांचवां भाव में
Putra Bhav — संतान, बुद्धि, प्रेम
शुभ फल
जातक शूर, साहसी, भ्रमणशील, विद्वान, भोगी व धनी होता है। वह ज्ञानी, तीक्ष्ण बुद्धि, तर्क-प्रवीण, प्रत्यक्षवादी होता है, वह कम बोलने वाला होता है। बोलने पर उसकी बात का दूसरों पर काफी असर पड़ता है। संसार में कीर्ति अर्जित करता है। विदेश यात्राएं करता है। जातक की उदर अग्नि, पाचन शक्ति तीव्र होती है। उसे भूख बहुत लगती है। वकीलों व डॉक्टरों के लिए यह मंगल प्रसिद्ध योग बनाता है। वैसे भी उसके घर पर कोई सगा संबंधी डॉक्टर पेशे से संबंध रखता है। सांसारिक क्षेत्र में जातक न्यायप्रिय होता है। जातक के माता-पिता की आर्थिक स्थिति चाहे कैसी भी हो, वह और उसकी संतान, पोते आदि समृद्ध जीवन व्यतीत करते होंगे। यदि जातक का बड़ा भाई जीवित हो, तो जातक अपनी संतान के जन्मदिन से उत्तरोत्तर उन्नति करेगा।
अशुभ फल
यदि मंगल अशुभ प्रभाव में हो तो जातक निर्धन, सुखहीन, पुत्रहीन, खल, क्रूर स्वभावी, कृतघ्न, पापबुद्धि व चुगलखोर होता है। उसे अच्छी नौकरी का सुख कम मिलता है। उदर, वात व कफ के रोगों से व्याकुल रहता है। अग्नि या शस्त्र से दाएं पैर पर चोट लगती है। जातक की इच्छाएं प्रबल रहती हैं, इसलिए उसे कभी जीवन में संतोष नहीं मिलता। मित्र, पत्नी व पुत्र का सुख नहीं मिलता। एकाध संतान गर्भ में या जन्म के बाद नष्ट हो जाती है। राजकोप से दंडित होता है। ये अशुभ फल प्रायः रात्रि को घटते हैं।
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