Jyotish Zone

मंगल चौथा भाव में

Sukh Bhavमाता, घर, सुख

शुभ फल

जातक दिल का सच्चा और सरल होता है। अपने परिवार को पालने में लगा रहता है। उसमें जोखिम लेने की हिम्मत होती है। रण में धैर्य रखता है और युद्ध में विजयी होता है। जातक को धनी लोगों, राज्य सरकार आदि से मान, सम्मान, वस्त्र व भूमि का लाभ होता है। उसे दबा हुआ धन प्राप्त होता है। भाभी से उत्तम संबंध रखना उसके लिए शुभ फल देता है।

अशुभ फल

चतुर्थ भाव का मंगल प्राय: अशुभ फल ही देता है। यह ग्रह अन्य ग्रहों के भी शुभ फल में बाधा डालता है। जातक में सहनशक्ति की काफी कमी होती है। बुद्धि पर पर्दा पड़ जाता है। शरीर में पित्त की अधिकता रहती है, अतः शरीर दुर्बल रहता है। इसके जन्म के बाद परिवार में धन की कमी हो जाती है। वह अपनी माता, सास, पत्नी की आयु के लिए अशुभ होता है। उसे मित्र, भाई, संबंधियों से, माता व बहन आदि से सुख नहीं मिलता। क्रोध के कारण प्रायः घर में कलह करता है। कभी चित्त की स्थिरता व शांति नहीं मिलती। नीच जनों की सेवा गुलामी करता है। वह महाकामी होता है। चारित्रिक पतन यहां तक हो जाता है कि दूसरे की स्त्री की ओर ही चित्त लगा रहता है। ऐसा व्यक्ति बिना सोचे समझे बोलता है। मुंह फाड़ कर दूसरों को उनके ऐब की बातें सुना देता है, इसलिए शत्रु बहुत होते हैं। पर ऐसा जातक स्वयं शत्रुता पर उतर आए, तो दूसरे के वंश का समूल नाश कर डालता है। ऐसे व्यक्ति के घर या पड़ौस में कोई विधवा स्त्री प्रायः रहती होती है, जिसकी सेवा से यह व्यक्ति आराम पा सकता है।

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