चौथा भाव — Sukh Bhav
माता, घर, सुख
सुख भाव
चतुर्थ भाव को सुख भाव कहते हैं। इस भाव के स्वामी को चतुर्थेश अथवा सुखेश भी कहते हैं। इसी भाव से जातक की समृद्धि, सुख, माता के साथ व्यवहार, उसकी सेहत और आयु आदि का विचार किया जाता है।
इस भाव का कारक: चंद्र और बुध
इस भाव का कारक चंद्र और बुध हैं। अर्द्धरात्रि में सूर्य चतुर्थ भाव में रहते हैं।
चतुर्थ भाव में बली राशियाँ
कर्क, मकर और मीन राशियाँ चतुर्थ भाव में बली मानी जाती हैं।
चतुर्थ भाव के मुख्य विषय
इस भाव के मुख्य विषय ये हैं:
- छाती, हृदय, सांस की नली और स्तन
- मानसिक अवस्था, शांति, भावनाएं, विश्वास, दया, उदारता और छल
- सुख और दुख
- विद्या और अध्ययन
- संपत्ति
- राजकृपा और जनता का स्नेह
- माता और माता का वंश
- वाहन, घर, जायदाद और फर्नीचर
- खेल
- बाज़ और तोता
- औषधि और आसव
- पानी, दूध और सुगंधित पदार्थ
- मंडप, तालाब और पुल
- कपड़े का व्यापार
- फोड़ा
- जल में रहने वाले पशु और दूध देने वाले पशु
- रस भरे फल वाले वृक्ष
- उत्तर दिशा
- नगरपालिका
- रसायनशाला
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