सूर्य चौथा भाव में
Sukh Bhav — माता, घर, सुख
शुभ फल
जातक उत्तम चरित्र का, दयालु व बुद्धिमान होता है। वह स्वयं हानि उठाकर भी दूसरों की हानि को रोकने वाले स्वभाव का होता है। जीवन में उत्तम अधिकार, मान, यश व धन पाता है। लोकप्रिय होता है। जातक राजा के समान जीवन व्यतीत करता है। स्वयं धन कमा कर इकट्ठा करेगा, जो उसके पुत्र-पौत्रों आदि के काम आता है। इसके भाग्य की माता-पिता की सेवा व दान होती है। परोपकारी होता है। यात्रा आदि से लाभ कमाता है।
अशुभ फल
जातक मूर्ख, दुर्बल, क्रूर हृदय व रोगी होता है। उसका चित्त शांत नहीं रहता। भाइयों से कलह व दुर्जनों से दुखी रहता है। पिता से विरोध रहता है। माता-पिता का सुख थोड़ा होता है। जातक यदि लालची, चोर या भ्रष्टाचारी हो तो निर्धन हो जाएगा। हर ओर हानि ही हानि होगी। उसके सामने उसका सब कुछ नष्ट हो जाता है। कोई उसकी मदद नहीं करता। जातक यदि वेश्या या परायी स्त्रियों से संबंध बनाए, तो पुत्र नहीं होगा या उसे संतान का सुख नसीब नहीं होगा। घर में क्लेश आदि के कारण मानसिक व्यथा रहेगी। शरीर का कोई अंग हीन या पीड़ित होता है।
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