Jyotish Zone

सूर्य पांचवां भाव में

Putra Bhavसंतान, बुद्धि, प्रेम

शुभ फल

जातक व्यवहार से सदाचारी, मर्यादावान व परोपकारी होता है। उसकी बुद्धि सूक्ष्म विषयों को ग्रहण करने में सक्षम होती है। जातक के भाग्य का पता उसके जन्मते ही चल जाता है। आयु के साथ-साथ उसकी धन समृद्धि भी बढ़ेगी। पारिवारिक बंधु-बांधवों के लिए अपना तन मन अर्पण कर देता है। संतान के जन्म से उसकी आजीविका में उन्नति होती है, पर पुत्र गिनती में कम ही होते हैं। जातक की आयु लंबी होती है। उसे राज्य कर्मचारी या साधु संतों की सेवा से लाभ होता है। वन, जंगल, पहाड़ों आदि में जातक भ्रमण करता है।

अशुभ फल

जातक कपटी और ठग्गी में चतुर होता है। अस्थिर मति होती है। छाती, कलेजे व हृदय में पीड़ा की संभावना रहती है। बचपन में दुख और जवानी में रोग घेरे रहते हैं। अत्यंत क्रोधी होता है। धर्म-कर्म में आलसी हो तो मान-हानि होती है। जातक प्रथम पुत्र से कष्ट पाता है या पुत्र इससे अलग रहता है।

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