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कर्क राशि

क्रम
4
तत्व
जल
स्वामी
चंद्र

खगोल परिचय

कर्क राशि का तारा मंडल रवि मार्ग का सबसे छोटा मंडल है जिसमें 13 तारे देखे जा सकते हैं। इसका एक सिरा हृद-सर्प मंडल को छूता है। इसमें मधु चक्र नाम का तारा समूह भी है, जो केकड़े का मुख्य शरीर बनाता है। 2 तारे पूर्वामुखी केकड़े की अगली टांगों पर हैं। इस राशि में पुनर्वसु का अंतिम भाग तथा पुष्य और आश्लेषा नक्षत्रों का पूर्ण भाग पड़ता है।

पौराणिक वर्णन

कर्क राशि प्रणव (ॐ) की चार मात्राओं को दर्शाता है जो कि चेतना की चार अवस्थाओं (जाग्रत, स्वपन, सुषुप्ति, तुरीया) की द्योतक है। ब्रह्मांड पुराण (4/12/78) के अनुसार यह कर्कट भंडासुर नामक दैत्य का पुत्र था।

यूनानी गाथाओं में हरक्यूलिस जब सर्प से युद्ध करने में व्यस्त था तो जूनो की आज्ञा से केकड़े ने उसे डंक मारा था जिसे हरक्यूलिस ने मार दिया था। परन्तु देवी जूनो ने उसे फिर से जीवित कर आकाश में राशि बना दिया। चैलिडयन लोग कर्क राशि के चमकते तारे को आकाश छिद्र मानते थे जिस मार्ग से आत्माऐं उतर कर मनुष्य शरीरों में प्रवेश करती थीं। मिश्री गाथा ने कर्क राशि को मधु मक्खी माना था, जिसके नाम पर इस मुख्य तारे को मधुचक्र कहा जाता है। वास्तव में ये 121 या अधिक सितारों का समूह है।

प्रकृति

गुलाबी रंग वाली इस राशि की आकृति केकड़े जैसी है। इसका स्वामी चन्द्र है। यह गुरु की उच्च तथा मंगल की नीच राशि है। शरीर में छाती, स्तन और हृदय तथा रक्त पर इसका अधिकार रहता है। कफ प्रकृति वाली इस राशि का स्वभाव संसार में उन्नति शांति उत्पन्न करना, लज्जावान होना, समय के अनुकूल आचरण करना है।

स्थान

यह राशि खेत, नदी, समुद्र तट, तालाब, कुआँ, प्याऊ, बावड़ी, जल से भरी भूमि, मनोहर जगहों में निवास करती है।

वस्तुएं

नारियल, केला, संतरा, मौसमी, दाल, चीनी, निम्बू, चाय, मसाले, गाजर, जल में रहने वाले प्राणी और पौधे।

प्रभाव

यदि जन्म या नाम राशि कर्क राशि हो तो जातक मध्यम कद का सुन्दर पुष्ट भरे गाल वाला, शास्त्र कुशल, दयालु, शीघ्रगामी होता है। वह माता पिता, साधुजनों की सेवा आदर करने वाला, मित्रों का प्यारा और स्त्री के वशीभूत होता है। उसकी स्त्री पतिव्रता होती है पर वह स्वयं पराई स्त्रियों में रमण करता है। जातक अपने पुरुषार्थ में एवं नौकरी आदि में अपने वंश की कीर्ति बढ़ाता है। वह तरल पदार्थों का शौकीन होता है।

सभी राशि वालों के साथ सामान्य शुभ संबंध रहते हैं परन्तु मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, मीन राशियों के साथ विशेष उत्तम संबंध होता है। अशुभ असर के समय जातक व्यसनी, व्यभिचारी होता है तथा दुष्टों की संगति करता है, प्राय: किसी मामलों में दोषी माना जाता है।

रोग

छाती, कमर, माथे, घाव या रोग, कैंसर, पाचन दुर्बलता, खांसी, न्यूमोनिया, नशीली दवाओं के रोग।

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