गुरु चौथा भाव में
Sukh Bhav — माता, घर, सुख
शुभ फल
जातक सुखी, राजमान्य, यशस्वी, मेधावी व दयालु होता है। वह लालची नहीं होता। उत्तम चरित्र व शांत प्रकृति वाला होता है। वह अपने कुल का मुखिया और देव गुरु का भक्त होता है। अपने इलाके में सम्मानित होता है। उसके घर में धार्मिक क्रियाएं, मंत्रोच्चारण आदि गूंजते रहते हैं व पांडित्यपूर्ण वाद-विवाद होते हैं। उसे उच्च प्रकार के वाहन और बाग-बगीचे वाले घर प्राप्त होते हैं। उसके शत्रु भी उसकी प्रशंसा करते हैं। वह शत्रुओं पर विजय पाता है। पूर्वजों से व राजकृपा से धन लाभ होता है। धर्म का पक्का होना और आध्यात्मिक रुचियां शुभ रहती हैं। देवराज इंद्र की तरह ऐश्वर्यशाली जीवन का स्वामी होता है।
अशुभ फल
जातक कपटी होता है। अहंकार से, शराब या परस्त्री सेवन से व अपनी अक्ल को सबसे बड़ा मानने से अपने कुल का नाश कर देता है। यदि पाप ग्रहों की दृष्टि आदि हो, तो घर का सुख नहीं मिलता। दूसरों के घर में रहना पड़ता है। माता या पिता का सुख भी कम होता है। भाई-बंधुओं से द्वेष रहता है। ऐसा जातक ऐश्वर्य पाकर भी मन से दुखी और असंतुष्ट रहता है। उसे पैतृक धन, संपत्ति नहीं मिलती। स्वयं धन उपार्जन करना पड़ता है।
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