Jyotish Zone

गुरु पांचवां भाव में

Putra Bhavसंतान, बुद्धि, प्रेम

शुभ फल

जातक बुद्धिमान, मोटी आंखों वाला, दर्शनीय रूपवाला, प्रतापी, दयालु, शुद्धचित्त व विनम्र होता है। वह उत्तम वक्ता, धारा प्रवाह बोलने वाला, कुशल तार्किक व लेखक होता है। ब्रह्मज्ञानी, मान-सम्मान वाला, कर्तव्य परायण, पर स्वभाव का उग्र होता है। मंत्रणा देने वाला, अनेक शास्त्रों का ज्ञाता, लेकिन गुणी होने पर भी उसकी धन संपत्ति सामान्य अवस्था की रहती है। विद्या संबंधी क्षेत्रों में सफल रहते हैं। इसलिए कुशल अध्यापक व प्रोफेसर बनते हैं। ईमानदारी के काम से धन में वृद्धि होती है। वकालत आदि से भी लाभ कमा सकते हैं। उसका पुत्र भी उसे जीवन में मदद करता है। अकेला गुरु पंचम भाव में कई पुत्र देता है। संतान उत्पत्ति के बाद उसका भाग्य बढ़ता है। जातक की तप, ध्यान व योगाभ्यास में तीव्र रूचि होती है।

अशुभ फल

जातक विलासी, भोग रत रहता है। उसकी शिक्षा पूरी नहीं होती है। यदि संतान कारक अन्य ग्रह भी अशुभ होते हैं, तो भी संतान सुख कम ही होता है। या तो पुत्र नहीं होते या उनसे क्लेश होता है। कार्य सफलता में अक्सर विघ्न आते रहते हैं। धन-लाभ के अवसर पर विरोध खड़ा हो जाता है।

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