Jyotish Zone

शुक्र चौथा भाव में

Sukh Bhavमाता, घर, सुख

शुभ फल

जातक विद्वान मुखिया, विवेकशील, मातृभक्त, कीर्तिमान, श्रमशील होता है। इसे यश, धन, बुद्धि, विद्या सभी प्राप्त होते हैं। यह बोलने का शौकीन होता है। वह सुगंधित तथा सुन्दर वस्तुओं का शौकीन होता है। यात्राओं से सफलता मिलती है। ऐसे जातक का चित्त उत्सव मनाने तथा मनोरंजन आदि में बहुत लगता है। ऐसे जातक समाज में बड़े महत्वपूर्ण कार्य करता है। जिसके कारण राज्य, मित्र, तथा अन्य लोग उसे बहुत मान देते हैं। उसका घर समृद्धि, बहुमूल्य वस्तुएं, बाग-बागीचे, वाहनों से भरा होता है। उसे सभी भौतिक सुख प्राप्त होते हैं। वह माता की सेवा करता है। परन्तु पत्नी के आधीन भी होता है। परन्तु इसकी पत्नी इसकी खूब सेवा करती है। विवाह के बाद भाग्य उदय होता है। धर्म आदि में उसकी रुचि, योग मार्ग में अधिक होती है।

अशुभ फल

यदि शुक्र अशुभ प्रभाव का हो तो जातक विक्षिप्त स्वभाव, बिलासी, निर्धन, कंजूस तथा कफ, नेत्र रोगों से पीड़ित होता है। माता को कष्ट होता है तथा एक से अधिक स्त्रियों से संबंध रहता है। जो उसको बर्बादी का कारण होती हैं। यह शुक्र जातक को धन के विघ्न से चिंतित रखता है। पत्नी की सेहत खराब रहती है खासकर गर्भाशय संबंधी रोग होते हैं। फलस्वरूप संतान की कमी होती है।

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