Jyotish Zone

केतु चौथा भाव में

Sukh Bhavमाता, घर, सुख

शुभ फल

जातक शूर, सत्यवादी, मधुरभाषी, परिश्रमी तथा समृद्ध होता है। शुभ केतु के समय राजयोग भी माना गया है। जातक को बंधु बांधवों का पूरा सुख रहता है। उसका घर वाहन, धन-धान्य से भरा होता है। देशान्तर का विचार बनता है, परन्तु यात्रा आरम्भ करने में बाधा आती है। पिता से उत्तम संबंध रहते हैं। परमात्मा के सहारे जीवन बिताता है।

अशुभ फल

जातक परनिंदा, आलोचना करने वाला, व्यग्र होता है। दुर्बल, चित्त प्रकृति तथा बात को बढ़ाने वाला होता है। जातक को माता तथा मित्रों से सुख नहीं होता। मित्रों द्वारा उसके पिता का धन नष्ट हो जाता है। अपने घर पर रहने पर उसे घबराहट लगी रहती है। अंत में वह दूसरों के घर पड़ा रहता है, कई बार जन्मभूमि भी छोड़नी पड़ती है। सभा आदि में उत्तम स्थान नहीं पाता।

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