केतु तीसरा भाव में
Sahaj Bhav — भाई-बहन, साहस, संवाद
शुभ फल
जातक परम तेजस्वी, गुणी, धनी, दीर्घायु, यशस्वी, धैर्यवान् होता है। यह प्रदेश वास करता है। ऐसे जातक का विषय भोग, ऐश्वर्य आदि सुख प्राप्त होता है। वह शत्रुओं तथा विरोधियों का नाश करता है। वाद-विवाद में भी विजयी रहता है। पत्नी से सुख तथा नेक संतान होती हैं। मित्रों के उपकार को तथा परमात्मा की कृपा को सदा याद रखता है। जातक धार्मिक चित्त वाला हो तो उदासीन, एकांतप्रिय होता है और अध्ययन, विद्या में कुशल होता है, खासकर यदि केतु मीन राशि में हो।
अशुभ फल
जातक बक-बक करता रहता है, व्यर्थ के विवाद का आदी होता है, दूसरे की हाँ में हाँ मिलाकर अंत में दुःखी होता है। हृदय रोग, कंपन रोग तथा कंधों व भुजाओं में पीड़ा होती है। भय, भ्रम व चिंता से चित्त समाज में अपमानित होता है। मुकद्दमों में अपने शत्रुओं की स्त्रियों तक को नहीं छोड़ता या उपभोग करता है। यात्रा तथा प्रदेश में परेशान जीवन जीता है। पत्नी से वियोग रहता है, सालियों से उत्तम संबंध नहीं होते। भाइयों तथा मित्रों को क्लेश होता है। भाइयों से संबंध खराब करना और भी बर्बादी का कारण होगा।
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