शनि छठा भाव में
Ari Bhav — शत्रु, रोग, ऋण
शुभ फल
जातक पुष्ट, निरोग शरीर, महाबली, शूर, प्रतापी, न्यायप्रिय या धनी, सुशिक्षित, तर्क कुशल, विजेता, दानियों में श्रेष्ठ होता है। अनेक लोगों का आश्रयदाता, गुणों की कद्र करने वाला होता है। काव्य कला में रुचि होती है। वाद-विवाद में जीतता है। चारों दिशाओं से यश फैलता है। राजा जितना समृद्ध होता है उसके घर में नौकर-चाकर, अनुयायी रहते हैं। राजकृपा पाता है। उसे चारों ओर राज्य से कभी हानि नहीं होती, युद्ध में विजयी रहता है। विरोधी तथा शत्रु नष्ट होते हैं। यह शत्रुओं से भी सम्मानित होता है तथा उनके उकसाने वालों का नाश करता है। लोहे या गैस आदि में संबंधित व्यापार में लाभ रहता है। इसकी जठराग्नि प्रबल होती है तथा यह खाने का शौकीन होता है। इसे पुत्र सुख होता है।
अशुभ फल
जातक घमंडी, ढीठ, कामी, कुटिल चरित्र, दरिद्र होता है। लोक अपवाद होता है। राज्य तथा पुलिस आदि महकमों में दुःख उठाता है। गुप्त शत्रु उभरते हैं। प्रमेह रोग गुप्त रोग होते हैं। मौसी, मामा के लिये यह शनि अशुभ फल कारक है। नौकरी आदि के कारण परेशान रहता है। यदि शनि नीच या शत्रु ग्रह में हो तो कुल नाश होता है।
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