केतु छठा भाव में
Ari Bhav — शत्रु, रोग, ऋण
शुभ फल
जातक उदार, गुणवान, प्रसिद्ध, दृढ़ प्रकृति। उसका शरीर रोगहीन होता है, रोग हो जाये तो शीघ्र ठीक हो जाता है। अपनी विद्या के बल पर वह यशस्वी होता है, जीवन में श्रेष्ठ पद पाता है। इसकी हर कामना पूरी हो जाती है। उसके शत्रुओं का नाश होता है। चौपायें, पशुओं से द्रव्य लाभ होता है। उसकी संतान उसे हर प्रकार से सहायता करती है।
अशुभ फल
जातक चालाकी या चापलूसी करवाने की आदत से हानि सहता है। उसे दान व होंठों के रोग होते हैं। उसका मन दुर्बल होता है। यात्रा आदि में परेशानी रहती है। मामा वंश के लिये यह केतु अशुभ फल देता है, मामा से उसकी शत्रुता रहती है।
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