कन्या राशि
- क्रम
- 6
- तत्व
- पृथ्वी
- स्वामी
- बुध
खगोल परिचय
इस कन्या मंडल के 6 मुख्य तारे हैं। ये तारे नील वर्ण, लाल वर्ण और पीले रंग के हैं अतः इस राशि को विचित्र भी कहा गया है। एक तारा कन्या के सिर वाले भाग में है। दूसरा नाभि तारा है और 2 तारे बांए अंग और 2 अन्य तारे दांयी टांग पर स्थित है। इस राशि के नीचले भाग में कांस्य व सुपर्ण नाम के तारा मंडल है। कन्या के उत्तर भाग में शिव भूतेश नाम का तारा मंडल पड़ता है। यह उत्तरा फाल्गुनी का 3/4 शेष भाग, पूर्ण स्वाति नक्षत्र एवं चित्रा का 1/2 भाग लिए हुए है।
पौराणिक वर्णन
दिव्य कन्या का रूप द्रोपदी के एक रूप में भी है, जो सिंह राशि के पांच तारों (पांडवों) की सहधर्मिणी है। एक अन्य मत से कन्या राशि भगवान् विष्णु का मोहिनी रूप है जिसके हाथ में अमृत का घड़ा है। कन्या राशि का नाम मातृ राशि कुमारी पर दिया गया है।
कन्या रूपेण देवानाम् अग्रतः दर्शन दे। (वृहद पुराण 1/19/62)
कन्याकुमारी का मंदिर प्रसिद्ध ही है। जिसके बायें हाथ में वत्स नाम का तारा है दूसरे हाथ में जौं लिए स्वयं नौका पर सवार है। अथर्ववेद में भी इसका वर्णन मिलता है।
मध्ये दिवः तरणिं भ्राजमानम् (अथर्ववेद 13/2/36)
फरात नदी के किनारे बैबीलोनिया में इसे इश्तर देवी का रूप माना गया है। यूनानी तथा रोमन गाथाओं में भी इसे कुमारी देवी के रूप में पूजते थे। यह न्यास और पवित्रता की देवी है, जो बाद में लोगों की कृतघ्नता देख कर आकाश में रह गई। आकाश में यह कन्या रूप में सिंह के पीछे दिखाई देती है।
प्रकृति
पीले रंग वाली इस राशि की आकृति जल के बीच नाव में बैठी, हाथ में दीपक या अग्नि लिए कन्या जैसी है। इसका स्वामी बुध है और यह बुध की ही उच्च राशि भी है। शुक्र इसमें नीच होते हैं। शरीर में आंतों, पित्ताशय व अपेंडिक्स पर इसका अधिकार है। वात प्रकृति वाली इस राशि का स्वभाव संसार में अपनी उन्नति और मान प्राप्ति के लिए ज्ञानार्जन व परिश्रम करने का है।
स्थान
नए घास वाली भूमि, अन्न-भंडार, नाच-गाना, रेस्तरां, वेश्या-गृह, नौका, मछुओं की बस्ती, विद्यास्थल, कन्या, विद्यालय, शिल्पभूमि में यह राशि निवास करती है।
वस्तुएं
मूंग, मूंगफली, तिल, राजमाह, मटर, अलसी, सार त्वचा वाले वृक्ष-बांस आदि इसकी वस्तुएं हैं।
प्रभाव
यदि जन्म या नाम राशि कन्या हो तो जातक गोरा, लंबा, उन्नत शरीर, सुंदर नेत्र, लंबे केश वाला होता है। ऐसा जातक कुटुंब और मित्रों को सुख देने वाला, धनी, कला-कुशल, शास्त्रों का जानकार, बुद्धिमान व प्रिय वक्ता होता है। विद्या अध्ययन में कुशल, धर्म-कर्म में रीति-रिवाजों को मानने वाला होता है। वह कामुक और लोकप्रिय होता है। विलास के नए ढंग खोजता है। शिक्षा, औषधि, खाद्य पदार्थों के व्यवसाय से लाभ और पराई सम्पत्ति को प्राप्त करता है।
वृष, मिथुन, तुला, मकर, कुंभ राशि वाले से मित्रता और मेष, वृश्चिक राशि वाले से शत्रुता रहती है। अशुभ असर के समय वह अल्प पुत्रवान्, अनेक शत्रु वाला होता है। अपनी स्त्री तक से उत्तम संबंध नहीं होते हैं।
रोग
शस्त्र से भय, उदर रोग, हैजा, कब्ज, पाचन-शक्ति के रोग, पेचिश, मोटापा, अपेंडिसाइटिस।
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