चंद्र पांचवां भाव में
Putra Bhav — संतान, बुद्धि, प्रेम
शुभ फल
जातक श्रेष्ठ विद्वान, संयमी, तेजस्वी, विनम्र व मेधावी होता है। जातक की चाल लयबद्ध और कोमल होती है। सत्य पर चलने से जातक को उत्तम आर्थिक स्थिति व मन की शांति दोनों प्राप्त होती है। स्वाभिमानी होने के कारण यह प्राणी राजा के सामने भी झुकना नहीं चाहता। दयालु व न्याय-प्रिय होता है। पुत्र सुख अवश्य हो सकता है, पर कन्याएं अधिक होंगी। संतान को अच्छी तरह पालने से भाग्य चमकेगा। ऐसे जातक की पत्नी पतिपरायण होती है। वह रूपवती, पर मान-कोप आदि में चतुर होती है। उसके दोनों स्तनों के बीच चिन्ह होता है। भूमि, व्यापार और भी दूसरे कई प्रकार से धन लाभ पाता है। राज्य में मंत्री या उच्च अधिकारी बनता है। यह जिसकी मदद पर आए, तो उसे जिता कर ही छोड़ता है। जातक यदि स्त्री-देवता की उपासना करे, तो जल्दी मनोकामना पूर्ण होती है।
अशुभ फल
जातक डरपोक, कामुक व रोगी होता है। व्यापार क्षेत्र में इसे अक्सर सफलता नहीं मिलती। उसे पोते का मुख देखना नसीब नहीं होता। अपने दुखों को दूसरों के आगे रोने से और भी परेशानी बढ़ती है। लालची और स्वार्थी होने पर जीवन में दुख व अशांति उत्पन्न होगी।
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