Jyotish Zone

मंगल आठवां भाव में

Randhra Bhavआयु, रूपांतरण, गूढ़ विद्या

शुभ फल

जातक साधारण जीवन बिताने का आदी होता है। वह स्वयं मेहनत करने वाला होता है। अपने वचन को पूरा निभाता है। न्यायप्रिय स्वभाव का, शत्रुओं का मुकाबला करने में समर्थ होता है। वह रत्नों का उत्तम पारखी होता है। अपने वर्ग के धनी लोगों में प्रमुख होता है। राजनीति में भाग लेता है। कम संतान वाला होता है। अक्सर उसका छोटा भाई नहीं होता। यदि मंगल शुभ ग्रहों की दृष्टि में हो तो जातक निरोग शरीर वाला और दीर्घायु होता है। घर में समृद्धि बढ़ती है। जातक को योगासनों से उत्तम स्वास्थ्य लाभ होता है।

अशुभ फल

अष्टम भाव का मंगल भी चतुर्थ भाव की तरह अशुभ फलदायक ही नहीं, बल्कि अन्य ग्रहों के शुभफल में भी बाधा डालता है। अक्सर स्थितियां और मित्र उससे सहयोग नहीं करते। बहुत प्रयत्न करने पर भी इच्छाएं पूरी नहीं होती। वह स्वयं भी अनुचित बोलने वाला, निर्दयी, धनहीन व निंदा करने का आदी होता है। जातक का शरीर अक्सर गंभीर रोगों, जैसे संग्रहणी, गुप्त रोग, रुधिर, विकार व पित्त के रोगों से पीड़ित रहता है, या फिर शरीर में शस्त्र, ऑपरेशन आदि से घाव के निशान बने रहते हैं। हो सकता है कि उसकी मृत्यु भी शस्त्र आदि से ही हो।

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