Jyotish Zone

गुरु आठवां भाव में

Randhra Bhavआयु, रूपांतरण, गूढ़ विद्या

शुभ फल

जातक सुंदर, उत्तम स्वास्थ्य वाला, दीर्घायु व बुद्धिमान होता है। धन चाहे उसके पास अधिक न हो, पर जीवन में सभी सुख अवश्य होते हैं। किसी की मृत्यु या वसीयत आदि से धन संपत्ति का लाभ होता है। घर में विश्वासपात्र नौकर होते हैं। अपनी व घर परिवार के लोगों की भी आयु लंबी होती है। उसका भाग्य परमात्मा की भक्ति से बढ़ता है। वह तीर्थ यात्रा, ध्यान, योगाभ्यास आदि में तीव्र रुचि रखता है। दुख के समय परमात्मा की ओर से मदद मिलती है। अंत में वह तीर्थ स्थल में शांत मृत्यु को प्राप्त होता है और बैकुंठवास करता है।

अशुभ फल

यदि गुरु अशुभ प्रभाव में हो तो जातक दीन, नीच, कुल की कीर्ति को नष्ट करने वाला, कंजूस, विवेकहीन, विनयहीन दुर्बल देह वाला होता है। वह अफवाहों से व लोगों से परेशान रहता है। शत्रुओं व विरोधियों से परेशान व अपमानित होता है। अक्सर उसकी 8 वर्ष की आयु से पहले उसके दादा का देहांत हो जाता है। जीवन में जेल जाने तक की नौबत आ जाती है। जातक को पिता से कम ही सुख मिलता है। पिता के घर में बहुत समय नहीं बिताता। जल्दी ही अलग हो जाता है। किसी निम्न वर्ग की विधवा स्त्री का उपभोग करता है। अंत में ऋणी होकर या इस कारण से जातक की मृत्यु भी कष्ट से होती है।

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