Jyotish Zone

गुरु नौवां भाव में

Dharma Bhavधर्म, भाग्य, उच्च शिक्षा

शुभ फल

जातक पुण्य कर्मी, विद्वान, व्रती, ज्ञानी, प्रसिद्ध मनुष्यों में श्रेष्ठ, धनवान पर लोभहीन, पवित्र आचरण वाला होता है। साधु स्वभाव का होता है। कुल की कीर्ति को बढ़ाने वाला होता है। उच्च शिक्षा प्राप्त करता है। स्त्रियों का प्रिय होता है। उसे पुत्र व भाई-बंधुओं से प्रेम मिलता है। उसका घर-मकान सुंदर व भव्य होता है। जातक राज्य के अफसरों, मंत्रियों आदि से उत्तम संबंध रखता है। स्वयं भी नेता प्रधान या उच्च अफसर होता है। सर्वशास्त्रों में रुचि होती है। जौहरी, अध्यापन, संपादन, प्रकाशन, न्याय व शिक्षा क्षेत्रों में विशेष सफल होता है। धार्मिक मामलों में रोजाना संध्या, वंदना, पूजा, ध्यान आदि में आलस्य व विघ्न नहीं आने देता है।

यह संस्कार उसे अपने पिता से मिले होते हैं। योग विद्या, अध्यापन व ज्ञान से जातक में भविष्य दर्शन व अंतर्ज्ञान आदि की शक्ति जाग्रत हो जाती है। उसका आशीर्वाद ही नहीं अपितु शाप भी शुभ फल दायक होता है।

अशुभ फल

गुरु यदि पीड़ित हो तो जातक ऊपरी दिखावा करने वाला, अभिमानी, संकुचित विचारों वाला, स्वार्थी होता है। बेकार की बातों और बर्ताव के कारण वह अपमानित होता है। यदि वह नास्तिक बन जाए, तो निर्धन और दुखी जीवन बिताता है। पुत्रों की ओर से भी उसे चिंता बनी रहती है।

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