दसवां भाव — Karma Bhav
कर्म, प्रतिष्ठा, अधिकार
कर्म भाव
दशम भाव को कर्म भाव कहते हैं। इस भाव के स्वामी दशमेश को कर्मेश भी कहते हैं। इसी भाव से जातक के कर्म, उसकी सफलता, पिता से उसका संबंध, उसकी सेहत और आयु आदि की जानकारी देखी जाती है।
इस भाव के कारक ग्रह: सूर्य, बुध, गुरु और शनि
इस भाव के कारक ग्रह सूर्य, बुध, गुरु और शनि हैं। दिन के मध्य यानि दोपहर के समय सूर्य इस भाव में रहते हैं।
दशम भाव में बली राशियाँ
मेष, वृष तथा सिंह राशियाँ दशम भाव में बली मानी जाती हैं।
पुरुषार्थ का भाव
नौवां भाव भाग्य का है, तो दशम भाव पुरुषार्थ को जताता है।
दशम भाव के मुख्य विषय
इस भाव के मुख्य विषय ये हैं:
- घुटने
- अस्थि-पिंजर
- नौकरी, व्यवसाय और जीविका
- राज्य-सम्मान और पदवी
- यश और ख्याति
- आज्ञा और हुकूमत
- घुड़सवारी
- वैभव
- सड़क
- युवराज
- प्रशासन
- राजगद्दी
- पिता
- सत्ता
- राजमुद्रा
- राजधानी
- पंचायत
- लोहा, लकड़ी और पत्थर
- मशीनें
- अंतरिक्ष और आकाश
- मगरमच्छ और सांप
- कांटेदार वृक्ष
- दक्षिण दिशा
- लोहे के कारखाने
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