शनि दसवां भाव में
Karma Bhav — कर्म, प्रतिष्ठा, अधिकार
शुभ फल
जातक शूर, सुखी, नीतिज्ञ, नम्र, चतुर, धनाढ्य, स्वाभिमानी, महत्वाकांक्षी, दूरदर्शी होता है। वह स्वयं नेता नहीं होता पर राज्य अधिकार प्राप्त करता है। वह सामाजिक लोक सेवा के कार्य करता है। दूसरों का मान करने से इसका भी मान बढ़ता है। जीवन में जातक धीरे-धीरे पर स्थिर प्रगति करता जाता है। भारी ज़मीन-जायदाद का स्वामी होता है। यह युद्ध की प्रतियोगिता में विजयी रहता है। राज्य में कोषाध्यक्ष, न्यायाधीश, जज आदि बनता है। इसे खेतीबाड़ी, बगीचे लगाने का शौक होता है। नौकरों से प्रेम तथा विश्वास से कार्य कराता है। विदेश में मान-प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। कई बार यह शनि संन्यास योग भी बना देता है। गंगा स्नान का पुण्य कमाता है।
अशुभ फल
जातक दुराचारी, कंजूस, हिंसक, निर्दयी, झूठा होता है। इसको जांघ के रोग होते हैं। जातक अपने अधिकार का दुरुपयोग करता है, अतः इसे बदनामी होती है। उसे वाहन सुख तथा मित्र सुख नहीं होता। कई बार नौकरी आदि में अवनति, सस्पेंड आदि हो जाता है। यदि क्रूर शनि हो तो माता के लिये कष्टकारक होता है। कई बार माता का मुख देखना भी नसीब नहीं होता। पिता के लिये भी अशुभ फलकारक है। इसे पैतृक संपत्ति प्राप्त नहीं होती। इसके पुत्र भी भ्रष्ट, दुराचारी, दुष्ट, धर्महीन होते हैं।
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