Jyotish Zone

केतु दसवां भाव में

Karma Bhavकर्म, प्रतिष्ठा, अधिकार

शुभ फल

जातक बुद्धि वाला, शास्त्रज्ञ, मिलनसार, प्रसिद्ध तेजाबी, शूर प्रमुख, शिल्पी होता है। विदेश वास से भाग्योदय होता है। शुभ राशि में केतु हो तो जातक के शत्रुओं का नाश होता है। युद्ध में कीर्ति कमाता है। इसका प्रभाव अतुलनीय होता है। वह सुखी और धनी होता है। वीणा आदि बजाने में कुशल होता है। वह सुखी होता है। उत्तम, यश तथा उत्तम वैभव जागता है। भाईयों से उत्तम संबंध रखने से जातक और भी तरक्की करता है।

अशुभ फल

जातक भाग्यहीन, कुरुप, परस्त्रियों में आसक्त रहता है। जातक जीवन में काफी कष्ट भोगता है। पशु सवारी आदि से गिरने के कारण चोट लगती है। वातरोग, पाँव में रोग, गुदा रोग होता है। व्यापार, नौकरी आदि में स्थिर तथा सफलता नहीं मिलती। जातक को माता, मित्र का सुख कभी नहीं मिलता, पिता भी कष्ट भोगता है तथा माता-पिता की भी आपस में अनबन रहती है। संतान का सुख नहीं मिलता खासकर पुत्र प्राप्ति में बाधाएं आती हैं या संतान पैदा होकर नष्ट हो जाती है।

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