Jyotish Zone

राहु दसवां भाव में

Karma Bhavकर्म, प्रतिष्ठा, अधिकार

शुभ फल

जातक परोपकारी, महाबली, धनी तथा शत्रुहीन होता है। वह लोक समूह का महान् नेता या विख्यात अधिकारी होता है। वह प्रवासी होता है तथा उसके सम्पर्क, मित्रता आदि विदेशी लोगों से बने रहते हैं। कोई वकालत या पुलिस संबंधी कामों से सफल रहता है। उसे रूपवान् युवतियों के साथ रतिसुख प्राप्त होता है। जातक गंगा स्नान का पुण्य लाभ करता है।

अशुभ फल

जातक व्यर्थ का घमंडी, वाचाल, भाग्यहीन, शीलहीन, कामुक, लड़ने को तत्पर, पराक्रमहीन, क्रूर होता है। इसे वातरोग होते हैं। वाहन आदि से कष्ट रहता है। मलेच्छ या नीच लोगों की संगति में रहता है। वह नशे में तथा अन्य दुष्ट कार्यों में धन का नाश करता है। अत: इसे दूसरे लोगों से कष्ट रहता है। नौकरी आदि में बाधाएं आती है। कभी सुख की साँस नहीं ले पाता। उसे पिता से पैतृक संपत्ति का सुख तथा उत्तम संबंध प्राप्त नहीं होते हैं। भ्राता तथा माता को कष्ट रहता है। वह विधवा स्त्रियों से संभोग करता है।

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