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शुक्र दसवां भाव में

Karma Bhav — कर्म, प्रतिष्ठा, अधिकार

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शुक्र दसवां भाव में

शुभ फल

जातक धनवान्, शुद्ध हृदय, सज्जन, विचारवान्, यशस्वी, प्रभावशाली, आदरणीय होता है। उसे कृषि, किसानों से, स्त्रियों से संबंधित व्यवसाय से धन लाभ होता है या राज्य सरकारी नौकरी करता है या खजाने का ऑफिसर बनता है तथा चतुर्मुखी बुद्धि से कीर्ति अर्जित करता है। उसके सभी कार्य पूर्ण होते हैं। वाहन सुख होता है। उसे अपनी पूँजी पर बहुत प्रेम रहता है। जातक धर्म में श्रद्धा रखता है। कई बार यज्ञ आदि करवाता है।

अशुभ फल

यदि शुक्र पाप प्रभाव में हो तो जातक पाखण्डी, विवादी, झगड़ालू, भोगी व अपने भ्रम के कारण अपना बनता कार्य बिगाड़ लेता है। जातक व्यभिचारी होता है। अधिक नारी भोग के कारण उसका वीर्य, संतान उत्पत्ति के समर्थ नहीं होता और अवैध संबंधों के कारण समाज में भी अपमानित होता है। यदि शुक्र दूषित प्रभाव में हो तो उसकी पत्नी भी बहुत कामुक होती है, जो स्वयं भी पर पुरुषों के साथ संबंध बना लेती है।

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