शुक्र नौवां भाव में
Dharma Bhav — धर्म, भाग्य, उच्च शिक्षा
शुभ फल
जातक पवित्रात्मा, परिश्रमी, उदार, गुणी, विद्वान, गुरु भक्त, धनी, भाग्यवान्, शीलवान् और क्रोधरहित होता है। वह उत्तम वस्त्रों और आभूषणों, भूमि का शौकीन होता है। वह धन, स्त्री, पुत्रों वाला होता है। अपने भुजबल से, परिश्रम से धन कमाता है। परन्तु वह ब्याज़ आदि से भी लाभ कमाता है। अतः यह उत्तरोत्तर धनी होता जाता है। परन्तु धार्मिक स्वभाव होने के कारण दान, सदाव्रत में लोगों को भोजन कराने में, वस्त्र बांटने में धन खर्च करता है। अतः आसपास के इलाके में काफी प्रसिद्ध होता है। वह अतिथि पूजा करता है। राज्य कर्म से अपनी तथा कुल की उन्नति कराता है। उसे उत्तम वाहन सुख मिलता है। तीर्थयात्राएं करता है। इसका पिता दीर्घायु होता है। ध्यान, तपस्या आदि कृत्य में रुचि रखता है।
अशुभ फल
यदि शुक्र दूषित हो तो जातक भाग्यहीन होता है। उसका विवाह बहुत देर से होता है या कई बार विजातीय स्त्री से, विधवा या बड़ी उम्र की स्त्री से विवाह होता है। इसका माता-पिता से विरोध रहता है तथा स्त्री के वशीभूत रहता है। यदि शुक्र नीच या शुभ ग्रह की राशि में हो या पाप ग्रहों से प्रभावित हो तो जातक गुरु पत्नी या अपने से रिश्ते में बड़ी स्त्री से व्यभिचार करता है।
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