सूर्य नौवां भाव में
Dharma Bhav — धर्म, भाग्य, उच्च शिक्षा
शुभ फल
जातक नेक व साधारण व्यवहार करने वाला होता है। वह शौर्यवान, कर्मवीर, सत्यवक्ता, सुंदर केशों वाला होता है। भूतकाल की बातों को भूल कर भविष्य के बारे में अधिक विचार करता है। वह देवता व विद्वानों का आदर करता है। कुल परम्परा से चले आए धार्मिक रिवाजों को निभाने वाला होता है। परोपकार में सदा आगे, जातक में निराश व्यक्तियों के जीवन में आशा का संचार करने वाली अजीब कुशलता होती है। इसलिए कुशल डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक बन सकता है। जातक परिवारिक जन की ही नहीं, दूसरे लोगों की भी पालना करता है। जातक स्वयं या उसका पिता या फिर दादा आदि अक्सर सरकारी नौकरी में होते हैं। समाज में पूजित होते हैं। जातक के पुत्र आदि भी योग्य होते हैं और उन्नति करते हैं।
अशुभ फल
जातक दुष्ट, क्रूर, दंभी, विवेकहीन व आचारहीन होता है। उसका चित्त अशांत, हर समय बात बदल जाने वाला होता है। बचपन में रोगादि से कष्ट रहता है। जातक में यदि मुफ्तखोरी की आदत हो, तो उसके पतन की निशानी होती है। भाइयों से अक्सर अनबन रहती है। गुरु, पिता, मामा, व स्त्री से भी प्रेम नहीं होता। अपना धर्म छोड़कर विधर्मी हो जाता है।
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