Jyotish Zone

राहु बारहवां भाव में

Vyaya Bhavव्यय, मोक्ष, विदेश

शुभ फल

जातक परोपकारी, खेहशील, रूपवान्, बहुत सुखी, पराक्रमी, मिलनसार, महत्वाकांक्षी भी होता है। वह बहुत धन कमाता है। परन्तु एक जगह स्थिर होकर व्यग्र कार्य करने से उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है। वह विदेश गमन करता है। उसको रात का आराम मिलता है। उसके ससुराल वाले अमीर होते हैं। वेदान्त में उसकी रुचि होती है। यह राहु अध्ययन, ज्ञान तथा मुक्ति प्राप्ति के लिये सहायक होता है।

अशुभ फल

जातक दीन, कपटी, कलहप्रिय, ऋणी, दरिद्री, शीलहीन, धर्महीन होता है। वह दिवा स्वप्न देखने वाला शेखचिल्ली होता है। वह गंदे नाखून तथा गंदे वस्त्रों वाला होता है। आँख, कान के रोग होते हैं। वह व्यर्थ समय नष्ट करता है या गुप्त रूप से कर्म करता है। कुल को कलंकित करता है। उसकी पसलियों में दर्द होता है। उसकी दुष्टों से मित्रता तथा सज्जनों से विरोध रहता है। उसका धन व्यर्थ के बड़े खर्चों, कोर्ट, कचहरी आदि में नष्ट होता है। उसके बने बनाए काम बिगड़ जाते हैं। पुत्र संतान अल्प होती है। उसके मामा को कष्ट रहता है, अपने क्रोधी स्वभाव के कारण दूसरों को दुःखी कर स्वयं भी संताप सहता है।

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